यूरोपीयन देशों ने भी Huawei को बाहर का रास्ता दिखाया

यूरोपीयन देशों ने भी Huawei को बाहर का रास्ता दिखाया

चीन की दूरसंचार कंपनी Huawei पर चीन के लिए अमेरिका की जासूसी करने का आरोप लगाया और देश में कंपनी पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद, ब्रिटेन ने भी कंपनी पर प्रतिबंध लगा दिया। फरवरी में, अब्राहम लियू (Huawei के शीर्ष कार्यकारी) ने फरवरी में दावा किया था कि यूरोप में कंपनी के उत्पादन को और बढ़ा दिया जाएगा ताकि यूरोप के लिए 5 जी यूरोप में ही बने। हालांकि, यूरोपीय सरकारें Huawei के जनसंपर्क अभियान पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रही हैं। हाल ही में कई यूरोपियन देशों ने 5 जी नेटवर्क के इस सौदे को खत्म कर दिया हैं।

Huawei सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंताओं के कारण अपनी छवि को होने वाले नुकसान को कम करने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए बड़े विज्ञापन दिए जा रहे हैं जिसमें यह दावा किया गया है कि यह वास्तव में ‘मेड इन फ्रांस’ है। सुरक्षा विशेषज्ञ और अब राजनेता भी दावा कर रहे हैं कि चीन कंपनी की 5 जी तकनीक और अन्य उपकरणों की मदद से फ्रांस के अंदर निगरानी और जासूसी कर रहा है।

फ्फिलहाल फ्रांस Huawei पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी नहीं कर रहा है, पर वह अपने टेलीकॉम ऑपरेटरों को इसका उपयोग नहीं करने के लिए भी बोल दिया है। जिन ऑपरेटरों ने पहले से ही सौदा किया है, उन्हें 8 साल की अनुमति दी गई है। जर्मनी अभी तक इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोल रहा है। वहा की चांसलर एंजेला मर्केल फिलहाल हुवावे पर किसी भी दबाव में प्रतिबंध नहीं लगाना चाहती हैं, लेकिन विपक्ष और उनकी पार्टी के नेताओं का यह भी कहना है कि खतरों को समय रहते समझना होगा और इसका समाधान भी करना पड़ेगा।

वहीं अन्य यूरोपीयन देश, स्पेन, हंगरी, आयरलैंड और स्वीडन, हुआवेई से होने वाले सुरक्षा के किसी भी खतरे को स्वीकार नहीं करते हैं, जबकि डेनमार्क में सुरक्षा चिंताओं को उठाया गया था, और Huawei के बजाय Ericsson को चुना गया था। जबकि रोमानिया, पोलैंड, चेक गणराज्य, लातविया और एस्टोनिया अमेरिका के साथ देते दिख रहे हैं।

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