फ्रांस में फिर एक दिन में 14 हजार से ज्यादा मामले सामने आए, ब्रिटेन में प्रतिबंधों का विरोध; दुनिया में 3.30 करोड़ केस


दुनिया में संक्रमितों का आंकड़ा 3.30 करोड़ से ज्यादा हो गया है। ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 2 करोड़ 44 लाख 05 हजार 383 से ज्यादा हो चुकी है। अब तक 9 लाख 98 हजार 688 मौतें हो चुकी हैं। ये आंकड़े www.worldometers.info/coronavirus के मुताबिक हैं। यूरोप के दो देशों फ्रांस और स्पेन में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। यहां संक्रमण की दूसरी लहर घातक साबित हो रही है। फ्रांस में शनिवार को 14 हजार नए मामले सामने आए।

फ्रांस : बढ़ता संक्रमण
फ्रांस में संक्रमण की दूसरी लहर भी घातक साबित हो रही है। इस हफ्ते की शुरुआत से लगभग हर दिन 13 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं। शनिवार को 14 हजार 412 मामले सामने आए। मंगलवार को 16 से ज्यादा नए मामले सामने आए थे। सरकार की परेशानी यह है कि वह सख्त प्रतिबंध लगाना तो चाहती है लेकिन कारोबारी संगठन और आम लोग इसके विरोध में उतर आए हैं।

मार्सिले में सरकार ने बार और रेस्टोरेंट्स बंद करने को कहा। लेकिन, स्थानीय प्रशासन ने इसका विरोध किया। इस शहर में दो क्लस्टर मिले हैं और दोनों रेस्टोरेंट्स से संबंधित हैं। दूसरी ओर, हेल्थ मिनिस्ट्री ने भी साफ कर दिया है कि संक्रमण को रोकने के लिए फिलहाल सावधानी से ही सबसे अच्छा उपाय है। लिहाजा, प्रतिबंधों का पालन तो करना ही होगा। फ्रांस में अब तक 5 लाख 27 हजार 446 मामले सामने आ चुके हैं।

हॉन्गकॉन्ग : हफ्तों बाद पहला मामला सामने आया
हॉन्गकॉन्ग में कई हफ्ते बाद पहला मामला सामने आया है। यहां सरकार ने इसे संक्रमण की तीसरी लहर बता दिया है। हेल्थ मिनिस्ट्री ने शनिवार रात जारी बयान में कहा- यह मरीज बहरीन से आया था और जांच के दौरान एयरपोर्ट पर ही उसके संक्रमित होने का पता लगा। फिलहाल, उसकी हालत के बारे में जानकारी नहीं दी गई है। बहरहाल, इस मामले के सामने आने के बाद अब प्रशासन नए प्रतिबंधों पर विचार कर रहा है।

चीफ एग्जीक्यूटिव कैरी लेम ने कहा- हमने संक्रमण पर दो बार पूरी तरह काबू पाया था। लेकिन, हमारे सामने अब तीसरी लहर का खतरा है। कम्युनिटी ट्रांसफर को खतरे नकारा नहीं जा सकता। लिहाजा, सख्त उपाय किए जाएंगे।

हॉन्गकॉन्ग में कई हफ्ते बाद पहला मामला सामने आया है। यहां सरकार ने इसे संक्रमण की तीसरी लहर बताया है। (फाइल)

ब्रिटेन : जॉनसन की मुश्किल
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कोविड-19 की दूसरी लहर को देखते हुए कई सख्त प्रतिबंध लगाए हैं। नागरिक तो इसका विरोध कर रही है रहे थे, अब संसद में भी जॉनसन की परेशानी बढ़ गई है। सांसदों का कहना है कि जॉनसन ने संसद और सांसदों को भरोसे में लिए बिना प्रतिबंधों का आदेश जारी किया। इसके वजह से लोगों में सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है। हाल ही में एक सर्वे भी किया गया। इसके नतीजों के मुताबिक, प्रतिबंधों के पहले ही हफ्ते में सरकार की लोकप्रियता में तीन फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कोविड-19 की दूसरी लहर को देखते हुए कई सख्त प्रतिबंध लगाए हैं। शनिवार को उनकी ही पार्टी के कुछ सांसदों ने इसका विरोध किया। (फाइल)

पेरू : साल के आखिर तक रह सकता है आपातकाल
संक्रमण की दूसरी लहर को लेकर लैटिन अमेरिकी देश पेरू ने सख्त रवैया अपनाया है। यहां राष्ट्रीय आपातकाल 31 अक्टूबर तक के लिए बढ़ा दिया गया है। प्रेसिडेंट मार्टिन विजकारा ने कहा- इस बात की संभावना है कि यह इमरजेंसी साल के आखिर तक बनी रहे। फिलहाल, हम इसे 31 अक्टूबर तक बढ़ा रहे हैं। पेरू की हेल्थ मिनिस्ट्री ने एक बयान में कहा- हम जानते हैं कि लोगों को कुछ प्रतिबंधों से काफी परेशान होना पड़ रहा है। लेकिन, कोविड-19 से बचने का फिलहाल यही उपाय है कि हम हर सावधानी बरतें। मास्क और सैनिटाइजेशन का खास ध्यान रखें।

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फ्रांस की राजधानी पेरिस की एक सड़क से गुजरती महिला। यहां पिछले हफ्ते हर दिन 13 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आए। सरकार सख्त प्रतिबंध लगाना चाहती है, लेकिन इनका विरोध शुरू हो गया है। (फाइल)

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